वॉशिंगटन: अमेरिकी चुनाव के नतीजों के बाद कई लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति पद पर रहते हुए भी राष्ट्रपति चुनाव क्यों नहीं जीत पाए. क्या ये इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने नस्लीय भेदभाव को लेकर भड़काऊ ट्वीट किए? या उनकी घटिया बयानबाजी, सरकार में कई महत्वपूर्ण लोगों का छोड़कर जाना? या फिर कोरोना महामारी ने उनका राष्ट्रपति का पद निगल लिया?

पहला कारण

ये अमेरिकी चुनाव ऐसे समय हुआ जब पूरी दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही है. इस महामारी ने अमेरिका को सबसे बुरी तरह प्रभावित किया है. कोरोना अमेरिका में करीब ढाई लाख लोगों की जान ले चुका है. ट्रंप अमेरिका जैसे सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में महामारी को नियंत्रित नहीं कर पाए. इस वजह से उन्हें काफी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा. चुनाव अभियान के दौरान जो बाइडेन ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया.

दूसरा कारण

अमेरिका में श्वेत-अश्वेत भेदभाव हर चुनाव में मुद्दा रहा है. कुछ महीने पहले ही अमेरिका में एक पुलिस वाले ने जॉर्ज फ्लॉयड की घुटने से गला दबाकर बेरहमी से हत्या कर दी थी, जिसके बाद काफी विरोध प्रदर्शन हुआ था. फ्लॉयड की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद अमेरिका के 14 राज्यों में हिंसा भड़क गई थी. 25 से ज्यादा शहरों कर्फ्यू लगाना पड़ा था.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिंसा पर काबू पाने की जगह भड़काऊ ट्वीट कर हिंसा को और भड़काने की कोशिश की. ट्रंप ने भड़काऊ ट्वीट कर चुनाव के लिए विभाजनकारी मुद्दा बनाने की कोशिश भी की. लेकिन शायद यही मुद्दा ट्रंप को उल्टा पड़ गया. अश्वेत वोट पूरी तरह से बाइडेन के खाते में जा गिरे. ट्रंप को हराने में अश्वेत नागरिकों का बड़ा योगदान माना जा रहा है.

तीसरा कारण

राष्ट्रपति ट्रंप अपने पूरे कार्यकाल के दौरान अपने बयानों को लेकर लगातार सुर्खियों में रहे. कई बार ट्रंप की ज़ुबान फिसल गई, जिस वजह से वह विवादों में घिरते रहे. चुनावी अभियान के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर को कई बार उनके ट्वीट हटाने पड़े. यहां तक अमेरिकी मीडिया ने कई बार ट्रंप को ‘झूठा’ करार दिया. उनके कई दावों को अमेरिकी मीडिया ने ‘फेक न्यूज’ बताया. ये सबकुछ जो बाइडेन के लिए फायदेमंद साबित हुआ. बाइडेन उतना ही बोले, जितना अभियान के लिए जरूरी था. इससे उनकी ज़ुबान कम फिसली और गलतियों के मौके कम बने.

चौथा कारण

2016 अमेरिकी चुनाव में ट्रंप ने उन विषयों पर भी खुलकर बात की जिनपर पहले राजनीतिक तौर पर चर्चा नहीं होती थी. अमेरिकीवासियों ने उन्हें लीक से हटकर चलने वाले और गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर देखा. शायद इसी वजह से ट्रंप ने साल 2016 में जीत हासिल की थी. अब 2020 में चुनाव इसलिए हार गए क्योंकि वह लीक से हटकर चलने वाले नेता थे जिसने उन विषयों के बारे भी बड़े आक्रामक ढंग से बयान दिए, जिनपर राजनीतिक लोग बोलने से बचते थे. उनके विपरीत जो बाइडेन ने शायद ही कभी आक्रामक रूप दिखाया हो.

पांचवां कारण

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की कुछ आव्रजन नीतियों से भारतीय पेशेवर बुरी तरह प्रभावित हुए थे. ट्रंप ने कई बार इस एच-1 वीजा के खिलाफ बयान दिया. जबकि एच-1 वीजा अमेरिका जाने वाले भारतीयों के लिए काफी अहम है. अमेरिका में भारतीय एच-1 बी वीजा पर रहते हैं. ट्रंप कार्यकाल में इस एच-1 बी वीजा के नियमों में बदलाव का डर भारतीयों में सताता रहा. जबकि बाइडेन इस वीजा के पक्ष में दिखाई दिए. जिससे प्रभावित होकर भारतीय मूल के ज्यादातर लोगों ने ट्रंप के खिलाफ मतदान दिया.

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