चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प उन विश्व नेताओं में से थे, जिन्होंने कोरोनॉयरस महामारी के वैश्विक प्रभाव पर चर्चा करने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पीएम मोदी से मुलाकात की. सऊदी अरब के किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद ने दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के मेजबान ने अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में, COVID-19 के टीकों विकास सहित उपकरणों के “सस्ती और न्यायसंगत पहुंच” के बारे में बात की. 

“हालांकि हम कोविड -19 के लिए टीके, चिकित्सा विज्ञान और निदान उपकरण विकसित करने में हुई प्रगति के बारे में आशावादी हैं, हमें सभी लोगों के लिए इन उपकरणों के लिए सस्ती और समान पहुंच की स्थिति बनाने के लिए काम करना चाहिए,” समाचार एजेंसी एएफपी ने उन्हें यह कहते हुए उद्धृत किया था.

उन्होंने कहा, “हमारा कर्तव्य है कि हम इस शिखर सम्मेलन के दौरान एक साथ चुनौती का सामना करें और इस संकट को कम करने के लिए नीतियों को अपनाकर अपने लोगों को आशा और आश्वासन का एक मजबूत संदेश दें.”

 

जी-20 सम्मेलन से पहले तुर्की के राष्ट्रपति और सऊदी के शाह ने फोन पर बात की

जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और सऊदी अरब के शाह सलमान से फोन पर बात की. राष्ट्रपति कार्यालय ने शनिवार के यहां यह जानकारी दी.  बता दें कि इसबार जी-20 सम्मेलन की मेजबानी सऊदी अरब कर रहा है. बयान के मुताबिक फोन पर बातचीत के दौरान नेताओं ने दोनों देशों के संबंधों को सुधारने पर चर्चा की. उल्लेखनीय है कि इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के महा वाणिज्य दूतावास के भीतर वर्ष 2018 में सऊदी पत्रकार जमाल खाशोगी की हत्या के बाद से तुर्की और सऊदी अरब के रिश्ते तेजी से खराब हुए.

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रिश्तों में कड़वाहट की एक वजह तुर्की द्वारा मुस्लिम ब्रदरहुड का समर्थन किया जाना भी है जिसे सऊदी अरब आतंकवादी संगठन मानता है. तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति एर्दोआन और शाह सलमान द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने और मुद्दों के समाधान के लिए बाचतीत के रास्ते को खुला रखने पर सहमत हुए हैं.”

कोविड-19 की महामारी के कारण G20 का सम्मेलन इस बार ऑनलाइन आय़ोजित किया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र का सालाना अधिवेशन भी वर्चुअल तरीके से ही हुआ था. G20 सम्मेलन का विषय कोविड-19 के संकट से उबरने का समग्र, सतत और लचीला रास्ता तलाश करना था. जी20 सम्मेलन (G20 Summit) के दौरान शीर्ष 20 देशों के बड़े नेता महामारी से लड़ने की तैयारियों पर चर्चा कर रहे हैं. सम्मेलन में सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार का है. समूह में शामिल सभी विकसित और विकासशील देश चिंतित हैं कि कैसे कोविड (Covid-19) संकट के दौरान बड़े पैमाने पर खत्म हुए रोजगार को दोबारा बहाल किया जा सके.

इस साल जी20 सम्मेलन की मेजबानी पहली बार सऊदी अरब कर रहा है. खशोगी प्रकरण के बाद सऊदी अरब दुनिया की अन्य आर्थिक शक्तियों के साथ अपने रिश्ते सुधारने में लगा है. यह पहली बार होगा कि जी20 के शीर्ष नेता वर्चुअल तरीके से अपनी बात सम्मेलन में रखेंगे. पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख के कारण जी20 सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर एकराय कायम करने में नाकाम रहा है. संभावना है कि जलवायु परिवर्तन का मुद्दा इस बार भी बैठक में उठे. यह सम्मेलन ऐसे वक्त हो रहा है, जब कोरोना संकट के बीच अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, भारत और अन्य तमाम देशों के बीच व्यापारिक और अन्य विषयों पर संकट गहरा गए हैं.

20 साल में पहली बार ऑनलाइन सम्मेलन

G20 संगठन की स्थापना 1999 में हुई थी. पहले इसमें सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर शामिल होते थे. वर्ष 2008 से इसमें सदस्य देशों के शासनाध्यक्ष शामिल होने लगे. इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना था. जी20 समूह में अमेरिका, भारत, चीन, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, अर्जेन्टीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, कनाडा, ब्राजील, तुर्की और यूरोपीय संघ सदस्य देश हैं.



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