गुतारेस ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में भारत के नेतृत्व के लिए उसकी सराहना की


तिरुमूर्ति ने ट्वीट करके संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का आभार जताया. उन्होंने बताया कि महासचिव ने कहा है, ‘‘वैश्विक महामारी के खिलाफ प्रयासों में भारत एक वैश्विक नेता रहा है”.

तिरुमूर्ति द्वारा ट्वीट किए गए पत्र के अंश के अनुसार, गुतारेस ने कहा कि 150 से अधिक देशों को अहम दवाइयां, नैदानिक किट, वेंटिलेटर और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण मुहैया कराके भारत वैश्विक महामारी से निपटने के प्रयासों में वास्तव में एक वैश्विक नेता रहा है.

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गुतारेस ने कहा, ‘‘विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा आपातकाल में इस्तेमाल की सूची में शामिल करने के लिए हाल में जिन दो टीकों को मंजूरी दी गई है, उनमें से एक टीके को विकसित करने और उसके निर्माण में भारत के प्रयासों ने वैश्विक टीका बाजार में अति आवश्यक आपूर्ति मुहैया कराई है. मैं समान पहुंच सुनिश्चित करने वाले ‘कोवैक्स सुविधा’ को समर्थन देने एवं उसे मजबूत करने के लिए आपके प्रयासों की भी प्रशंसा करता हूं.”

कोवैक्स कोविड-19 टीकों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की वैश्विक पहल है. दुनिया का औषधालय कहे जाने वाले भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षकों के लिए कोविड-19 रोधी टीकों की दो लाख खुराक भेंट करने की घोषणा की है.

इससे पहले, महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने ‘पीटीआई’ से कहा था, ‘‘ भारतीय प्रतिनिधिमंडल की इस भेंट की घोषणा के हम बेहद आभारी हैं. संयुक्त राष्ट्र का सहयोग विभाग टीकों को बांटने का काम करेगा.” भारत द्वारा टीके की दो लाख खुराकों को उपहार में देने का मतलब है कि संयुक्त राष्ट्र मिशन के सभी शांतिरक्षकों को टीके की आवश्यक दोनों खुराकें लग पाएंगी. संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना के अनुसार विश्व में अभी कुल 12 अभियानों में कुल 94,484 कर्मी तैनात हैं. संयुक्त राष्ट्र के शांति स्थापना अभियानों में कुल 121 देशों के कर्मी तैनात है, जिनमें से सबसे अधिक सैनिक भारत के हैं.

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उल्लेखनीय है कि विदेश मंत्री जयशंकर ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर देशों के शत्रुता उन्मूलन पर प्रस्ताव 2532 (2020) के क्रियान्वयन पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की डिजिटल खुली बहस के दौरान कहा था, ‘‘मुश्किल परिस्थितियों में काम करने वाले संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षकों को हम दो लाख खुराक उपहार स्वरूप देने की घोषणा करना चाहते हैं.” उन्होंने भगवत गीता का जिक्र करते हुए कहा था, ‘‘हमेशा दूसरों का कल्याण की बात मन में रखकर अपना काम करो.”

उन्होंने बैठक में कहा था कि भारत इसी दृष्टिकोण के साथ कोविड-19 चुनौती से निपट रहा है और उन्होंने परिषद से अपील की कि वह इस चुनौती के विभिन्न आयाम से निपटने के लिए मिलकर काम करे.

जयशंकर ने परिषद को बताया था कि दुनिया का औषधालय भारत कोविड-19 के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में अग्रणी रहा है और उसने पहले ही 150 से अधिक देशों को अहम दवाइयां, नैदानिक किट, वेंटिलेटर और पीपीई मुहैया कराई हैं, जिनमें 80 देशों को अनुदान के तौर पर मदद दी गई. उन्होंने बताया था कि स्वदेश निर्मित एक टीके समेत दो टीकों के इस्तेमाल को पहले ही आपात स्थिति में इस्तेमाल के लिए अधिकृत किया जा चुका है. इसके अलावा कम से कम 30 टीके विकास के विभिन्न चरणों में है. उन्होंने बताया था कि भारत ‘टीका मैत्री’ की पहल के तहत दुनिया को टीके मुहैया करा रहा है और अपने मित्रों एवं साझेदारों को टीके सीधे भेज रहा है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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