कोरोना वायरस संक्रमण की महामारी ने दुनिया भर में अप्रत्याशित स्थिति पैदा कर दी है. ज्यादातर आशावादी और सकारात्मक लोगों को इस साल अपने दृष्टिकोण से जूझना पड़ा है. इस साल अगर जश्न मनाने के मूड में होने की कोई वजह नहीं है, तो आपको जिंदगी के प्रति सकारात्मक रवैया जान बूझकर रखने की जरूरत है क्योंकि ये आपके मानसिक स्वास्थ्य और याद्दाश्त के साथ बेहद मददगार साबित हो सकता है.

सकारात्मक रवैया और स्मरण शक्ति के बीच क्या है संबंध?

हाल ही में इलिनोइस में नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी की तरफ से शोध किया गया है. शोध में खुलासा हुआ है कि जो लोग सकारात्मक और आम तौर पर जिंदगी के बारे में उत्साही होते हैं, उनके उम्र ढलने पर भी स्मरण शक्ति के क्षीण होने की संभावना कम रहती है. स्मरण शक्ति का क्षीण होना स्वाभाविक होता है. जब किसी शख्स की उम्र ढलती है तो उसके साथ स्मरण शक्ति भी कमजोर होने लगती है. लेकिन उसका मानसिक दृष्टिकोण इस प्रक्रिया को धीमा कर सकता है.

मानसिक दृष्टिकोण स्मरण शक्ति बढ़ाने का करता है काम

साइकोलॉजिकल साइंस नामक पत्रिका में प्रकाशित शोध को 1 हजार अमेरिकी व्यस्कों पर किया गया था. शोधकर्ताओं ने अलग-अलग समय 1995-1996, 2004-2006 और 2013-2014 के दौरान प्रतिभागियों से भावनाओं को बताने के लिए कहा. स्मरण शक्ति की जांच करने से पहले 30 दिनों तक चले शोध में उनसे पूछा गया कि उन्हें कैसा महसूस हुआ. शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की उम्र, लिंग, शिक्षा और डिप्रेशन रिपोर्ट को भी मद्देनजर रखा. इस दौरान वैज्ञानिक ‘सकारात्मक प्रभाव’ और ‘स्मरण शक्ति के क्षीण होने’ के बीच संबंध का पता लगाने में सक्षण हो गए. दूसरे शब्दों में कहा जाए तो शोध में शामिल सभी प्रतिभागियों की उम्र के साथ याद्दाश्त में प्राकृतिक गिरावट देखी गई. शोध के मुताबिक, जिन लोगों में सकारात्मक प्रभाव की दर ज्यादा थी, उनमें सूचना को याद करने की क्षमता ज्यादा बेहतर पाई गई.

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